देवप्रयाग (टिहरी)। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के योग विज्ञान के छात्र मोहित सिंह ने योग के प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता के लिए अनोखा मार्ग व माध्यम चुना है। वह इसके लिए द्वादश ज्योतिर्लिंगों और भारत के चार धामों को साइकिल से नाप रहे हैं।

लगभग नौ हजार किमी की इस यात्रा के मार्ग में और इन तीर्थ स्थलों पर वह लोगों को योग का महत्त्व बताते हुए इसे अपनाने की प्रेरणा देंगे। फिलहाल वह बदरी, केदार और तुंगनाथ की यात्रा कर चुके हैं।

रुद्रप्रयाग निवासी मोहित सिंह ने श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर से योग विज्ञान विभाग की एमएससी द्वितीय वर्ष की परीक्षा दी है। मोहित सिंह की योग में गहन रुचि है।

इसके प्रचार-प्रसार और योग को अधिक से अधिक लोगों के बीच ले जाने के लिए उन्होंने साइकिल यात्रा करने की ठानी। वह एक वर्ष तक इस यात्रा पर रहेंगे। लगभग 20 किलो की उनकी साइकिल में कुछ कपड़े और खाने-पीने का सामान होता है।

बीते 21 मई को उन्होंने रुद्रप्रयाग से इस यात्रा का शुभारंभ किया था। अभी तक वह भारत के उत्तर के धाम बदरीनाथ और ज्योतिर्लिंग केदारनाथ व तुंगनाथ की यात्रा कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में एक दिन पड़ाव डाला।

यहां से सोमवार को परिसर निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम और योग विभाग विभाग के समन्वयक डा. सुधांशु वर्मा ने उन्हें रुद्राक्ष की माला भेंटकर यात्रा पर रवाना किया।

मोहित सिंह यहां से वाराणसी के लिए रवाना हुए। वह काशी के साथ ही द्वारका, पुरी, रामेश्वरम्, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, सोमनाथ आदि पवित्र स्थलों की यात्रा करेंगे। मोहित सिंह ने बताया कि उनकी इस यात्रा में लगभग एक वर्ष का समय लगेगा।

एक दिन में वह औसतन 80 किमी की यात्रा करते हैं। बताया कि किसी से इस यात्रा के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं ली गई है। मोहित का कहना है कि योग स्वयं में बहुत बड़ा विज्ञान है।

यह व्यक्ति को जीने का सलीका सिखाता है। यह हमारे स्वास्थ्य की कुंजी है। विदेश में लोग योग के दीवाने इसके महत्व के कारण ही हैं।

योग को अपेक्षित पहचान अभी नहीं मिल सकी है। इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि देश-दुनिया के अधिक से अधिक लोग इसे अपनाकर स्वस्थ रह सकें। मेरी यात्रा का यही उद्देश्य है।

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