बागेश्वर। देश की सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए गजेंद्र गढ़िया के गांव में सोमवार की रात शोक रहा। कपकोट के वीथी-गैनाड़ गांव में किसी के घर चूल्हा नहीं जला। 25 परिवारों वाले इस छोटे से गांव में हर आंख नम है और हर दिल अपने लाल के अंतिम दर्शन की प्रतीक्षा कर रहा है।

गांव वालों के अनुसार गजेंद्र जैसा मिलनसार और मददगार व्यक्ति पूरे क्षेत्र में दूसरा नहीं था। उनके बलिदान की खबर से पूरा गांव फूट-फूट कर रो रहा है। सबसे मार्मिक स्थिति यह है कि बलिदानी की मां चंद्रा गढ़िया को अभी तक यह नहीं बताया गया है कि उनका बेटा देश के लिए बलिदान हो गया है। घर में मां के साथ बुआ रमुली देवी हैं, जो अनहोनी की आशंका से सहमी हुई हैं।

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