उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी (भगत दा) को राष्ट्र निर्माण, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा में उनके अमूल्य योगदान के लिए प्रतिष्ठित पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी।

मूल रूप से बागेश्वर जिले के ग्राम पलानधुरा से आने वाले कोश्यारी ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की और एक शिक्षक के रूप में अपने कॅरिअर की शुरुआत की।

एक समर्पित आरएसएस स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने उत्तराखंड के दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में सरस्वती शिशु मंदिर और कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की। आपातकाल के दौरान मीसा के तहत जेल जाने वाले कोश्यारी का राजनीतिक सफर भी बेहद शानदार रहा है।

वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में अपनी सेवाएं दीं। जहां उन्होंने वन रैंक वन पेंशन और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अहम सिफारिशें कीं। ऊर्जा मंत्री के रूप में ऐतिहासिक टिहरी हाइड्रो परियोजना को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही।

इसके अलावा, उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल और गोवा के राज्यपाल के अतिरिक्त प्रभार के रूप में भी प्रशासनिक दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। राजनीति और समाज सेवा के साथ-साथ लेखन में रुचि रखने वाले भगत दा ने उत्तराखंड के विकास पर दो पुस्तकें उत्तरांचल प्रदेश क्यों और उत्तरांचल प्रदेश : संघर्ष एवं समाधान भी लिखी हैं।

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